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अब-रसोई-ऊंघती-रहती-है

संजय स्वतंत्र।किसी जमाने में घर की चक्की उदास रहती थी। अब रसोई ऊंघती रहती है। न कोई मसाला कूटता है, न कोई चटनी बनाने का जतन करता है। अब झटपट का जमाना है। इसलिए...
Aug 14, 2019